भविष्य में होगा इसका इस्तेमाल
दिल्ली सरकार के सूत्रों के मुताबिक यह कदम उन गरीब लोगों को भूख से बचाने के लिए उठाया गया है जो दिहाड़ी मजदूरों की भांति काम करते हैं, सड़कों या किसी भवन के सामने सो जाते हैं, और जिनके लिए किसी तरह का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता है।